शुक्र ग्रह

शुक्र ग्रह

 

शुक्र ग्रह, Daimond, opal gem, gemstone, Vastu Cosmos वैदिक ज्योतिष में शुक्र को मुख्य रूप से पत्नी का का कारक माना गया है. यह विवाह का कारक ग्रह है, ज्योतिष में शुक्र से काम सुख, आभूषण, भौतिक सुख सुविधाओं का कारक ग्रह है. शुक्र से आराम पसन्द होने की प्रकृति, प्रेम संबन्ध, इत्र, सुगन्ध, अच्छे वस्त्र, सुन्दरता, सजावट, नृ्त्य, संगीत, गाना बजाना, काले बाल, विलासिता, व्यभिचार, शराब, नशीले पदारथ, कलात्मक गुण, आदि गुण देखे जाते है. पति- पत्नी का सुख देखने के लिए कुंडली में शुक्र की स्थिति को विशेष रुप से देखा जाता है. शुक्र को सुंदरता, ऐश्वर्य तथा कला के साथ जुड़े क्षेत्रों का अधिपति माना जाता. है  |

शनि व बुध शुक्र के मित्र ग्रहों में आते है. शुक्र ग्रह के शत्रुओं में सूर्य व चन्द्रमा है. शुक्र के साथ गुरु व मंगल सम सम्बन्ध रखते हैं. शुक्र वृ्षभ व तुला राशि के स्वामी हैं. शुक्र तुला राशि में 0 अंश से 15 अंश के मध्य होने पर मूलत्रिकोण राशिस्थ होता है. शुक्र मीन राशि में 27अंश पर होने पर उच्च राशि अंशों पर होता है. शुक्र कन्या राशि में 27अंश पर होने पर नीच राशि में होता है. शुक्र ग्रह की दक्षिण-पूर्व दिशा है. शुक्र का रत्न हीरा है और उपरत्न जरकन एवं फायर ओपल होता है.

शुभ शुक्र के लक्षण

कुंडली में शुक्र की प्रबल स्थिति जातक को शारीरिक रूप से सुंदर और आकर्षक बनाती है. शुक्र के प्रबल प्रभाव से महिलाएं अति आकर्षक होती हैं. शुक्र के जातक आम तौर पर फैशन जगत, सिनेमा जगत तथा ऐसे ही अन्य क्षेत्रों में सफल होते हैं. शुक्र शारीरिक सुखों के भी कारक हैं प्रेम संबंधों में शुक्र की महत्वपूर्ण भूमिका होती है.शुक्र का प्रबल प्रभाव जातक को रसिक बनाता है शरीर के अंगों में शुक्र जननांगों के कारक होते हैं तथा महिलाओं के शरीर में शुक्र प्रजनन प्रणाली का प्रतिनिधित्व करते हैं|

अशुभ एवं नीच  शुक्र के लक्षण

शुक्र शरीर में वायु, कफ. आंखें, जननागं पेशाब, वीर्य का प्रतिनिधित्व करता है. शुक्र के कमजोर होने पर व्यक्ति को यौन संबन्धित रोग, मधुमेह, पेशाब की थैली, गुरदे में पथरी, मोतियाबिन्द, बेहोशी, के दौरे, जननांग संबन्धित परेशानियां, सूजन, शरीर में यंत्रणात्मक दर्द, श्वेत प्रदर, मूत्र सम्बन्धित रोग, चेहरे, आंखों और गुप्तागों से संबन्धित रोग, खसरा, स्त्रियों में माहवारी और उससे संबन्धित रोग परेशान कर सकते हैं.

दूषित एवं नीच शुक्र के लिए रत्न हीरा

 

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                          Daimond

हीरा, Daimond, धारण करने की विधि

 

यदि आप शुक्र देव का रत्न हीरा धारण करना चाहते है, तो 0.50 से 2 कैरेट तक के हीरे को चाँदी या सोने की अंगूठी में जड्वाकर किसी भी शुक्लपक्ष के शुक्रवार को सूर्य उदय के पश्चात  अंगूठी को निकाल कर ॐ शं शुक्राय नम: या  का 108 बारी जप करते हुए  मध्यमा  ऊँगली में धारण करे!  हीरा अपना प्रभाव 25 दिन में देना आरम्भ कर देता है, और लगभग 3 वर्ष तक पूर्ण प्रभाव देता है फिर निष्क्रिय हो जाता है! 3 वर्ष के पश्चात् पुनः नया हीरा धारण करे! अच्छे प्रभाव प्राप्त करने के लिए हीरे का रंग सफ़ेद और कोई काला दाग नहीं होना चाहिए !

जो जातक हीरा नहीं पहन सकते उनको फायर ओपल  धारण करना चाहिए |

ध्यान रहेहीरे के साथ माणिक्य, मोती, मूंगा, पुखराज वर्जित है –  धारण करें


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वैदिक ज्योतिष में शुक्र को मुख्य रूप से पत्नी का का कारक माना गया है. यह विवाह का कारक ग्रह है, ज्योतिष में शुक्र से काम सुख, आभूषण, भौतिक सुख सुविधाओं का कारक ग्रह है. शुक्र से आराम पसन्द होने की प्रकृति, प्रेम संबन्ध, इत्र, सुगन्ध, अच्छे वस्त्र, सुन्दरता, सजावट, नृ्त्य, संगीत, गाना बजाना, काले बाल, विलासिता, व्यभिचार, शराब, नशीले पदारथ, कलात्मक गुण, आदि गुण देखे जाते है. पति- पत्नी का सुख देखने के लिए कुंडली में शुक्र की स्थिति को विशेष रुप से देखा जाता है. शुक्र को सुंदरता, ऐश्वर्य तथा कला के साथ जुड़े क्षेत्रों का अधिपति माना जाता. है |
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