posted by Guruji Dharamveer Attri

Shani Dev | Shani Greh | Vastu Cosmos | Guruji Dharamveer Attri | Vastu Scholar | Astrology Expert
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ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह का विशेष स्थान है ।शास्त्रों में शनि को संतुलन व न्याय का ग्रह माना गया है ।कई ज्योतिश विदों ने शनि को क्रोधी ग्रह भी माना है और यदि किसी व्यक्ति से कुपित हों जाए तो व्यक्ति के हंसते-खेलते संसार को बर्बाद भी कर देता हैं ।इस संसार में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जो शनि के प्रभाव से अछूता हो ।शनि देव का नाम सुनते ही व्यक्ति में भय उत्पन्न हो जाता है ।शनि के प्रति सभी का डर सदैव बना रहता है ।शनि के कारण जीवन की दिशा , सुख, दुख आदि सभी बात निर्धारित होती है ।वास्तविकता में शनि कुकर्मियों को पीड़ित करता है तथा सुकर्मियों व कर्मठ लोगों का भग्यौदय करता है ।यदि किसी व्यक्ति के कर्म अच्छे नहीं हैं तो शनि भाग्य हर कर पापियों को कंगाल बना देता है परंतु किसी भी व्यक्ति पर अपना असर डालने पर व्यक्ति को कुछ संकेत देता है ।यह संकेत एक प्रकार की चेतवानी होती है की व्यक्ति अपने कर्म सुधारे और जीवन के मार्ग पर कर्म व धर्म अपनाकर अकर्म व अधर्म का परित्याग करे ।

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शनि कुंडली के त्रिक (6, 8, 12) भावों का कारक है ।अगर व्यक्ति धार्मिक हो , उसके कर्म अच्छे हों तो शनि से उसे अनिष्ट फल कभी नहीं मिलेगा ।शनि से अधर्मियों व अनाचारियों को ही दंड स्वरूप कष्ट मिलते हैं । मत्स्यपुराण के अनुसार शनि की कांति इंद्रनी लमणि जैसी है । कौआ उसका वाहन है । उसके हाथों में धनुष बाण , त्रिशूल और वरमुद्रा हैं ।शनि का विकराल रूप भयानक है ।वह पापियों के संहार के लिए उद्यत रहता है । शास्त्रों में वर्णन है कि शनि वृद्ध , तीक्ष्ण, आलसी, वायु प्रधान, नपुंसक, तमोगुणी और पुरुष प्रधान ग्रह है ।शनिवार इसका दिन है । स्वाद कसैला तथा प्रिय वस्तु लोहा है । शनि राज दूत , सेवक, पैर के दर्द तथा कानून और शिल्प, दर्शन, तंत्र, मंत्र और यंत्र विद्याओं का कारक है । ऊसर भूमि इसका वास स्थान है। इस का रंग काला है ।यह जातक के स्नायुतंत्र को प्रभावित करता है । यह मकर और कुंभ राशियों का स्वामी तथा मृत्यु का देवता है ।यह ब्रह्मज्ञान का भी कारक है , इसीलिए शनि प्रधान लोग संन्यास ग्रहण कर लेते हैं ।शनि सूर्य का पुत्र है एवं मित्र राहु और बुध हैं । शनि के दोष को राहु और बुध दूर करते हैं । शनि दंडाधिकारी भी हैं । यही कारण है कि यह साढ़े साती के विभिन्न चरणों में जातक को कर्मानुकूल फल देकर उसकी उन्नति व समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है । कृषक, मजदूर एवं न्याय विभाग पर शनि का अधिकार होता है ।

शनि ग्रह का रत्न नीलम : 

नीलम रत्न शनि गृह का प्रतिनिधि रत्न है , यह एक अत्तयंत प्रभावशाली रत्न होता है | कहते है की यदि नीलम किसी भी व्यक्ति को रास आ जाए तो वारे न्यारे कर देता है   नीलम शनि गृह का रत्न है इसलिए शनि गृह सम्बंधित सभी विशेषताए इस में विद्यमान होती है , वैदिक ज्योतिष के अनुसार शनि का सम्बन्ध श्रम और मेहनत से होता है , 

ज्योतिष अनुसार ये नीले रंग का होता है | नीलम स्टोन बहुत ही ज्यादा ऊर्जा वाला माना जाता है |

वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुम्भ लग्न वालों के लिए नीलम अच्छा रहता है ।  

 शनि ग्रह व्यवसाय, समृद्धि,  इत्यादि का कारक है ।नीलम से बिज़नस और करियर संबंधी परेशानियां दूर होती है| इसके डालने का असर आपको 24 घंटे में ही दिख जाता है | चाहे यह  अच्छा हो या बुरा | 

ध्यान रहे : 

नीलम तभी पहनना चाहिए यदि शनि कुंडली में योग कारक हों अन्यथा नीलम अनिष्ट्कारक हो सकता है | इसलिए हमेशा अपनी कुंडली दिखा के ही नीलम रत्न पहने |

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