posted by Guruji Dharamveer Attri

Vastu Cosmos | Surya Dev | Surya Greh
Vastu Cosmos | Surya Dev | Surya Greh

ज्योतिष में सूर्य को राजा की पदवी प्रदान की गयी है| ज्योतिष के अनुसार सूर्य आत्मा एवं पिता का प्रतिनिधित्व करता है| सूर्य द्वारा ही सभी ग्रहों को प्रकाश प्राप्त होता है |  सूर्य सृष्टि को चलाने वाले प्रत्यक्ष देवता का रूप है| कुंडली में सूर्य को पूर्वजों का प्रतिनिधि भी माना जाता है| कहीं  कहीं सूर्य पर  बुरे ग्रहों का प्रभाव होने पर उस कुंडली में पितृ दोष का निर्माण हो जाता है | व्यक्ति की आये  में सूर्य सरकारी पद का प्रतिनिधित्व करता है | सूर्य प्रधान जातक कार्यक्षेत्र में कठोर अनुशासन अधिकारी, उच्च पद पर आसीन अधिकारी, प्रशासक, समय के साथ उन्नति करने वाला, निर्माता, कार्यो का निरीक्षण करने वाला बनता है| बारह राशियों में से सूर्य  सिंह तथा धनु में  विशेष रूप से बलवान होता है तथा मेष राशि में सूर्य को उच्च का होकर अति बलवान माना जाता है| यदि जातक की कुंडली में सूर्य बलवान तथा किसी भी बुरे ग्रह के प्रभाव से रहित है तो जातक को जीवन में बहुत कुछ प्राप्त होता है और स्वास्थ्य उत्तम होता है. सूर्य बलवान होने से जातक तेजवान  तथा चुस्त-दुरुस्त होता है.|

सूर्य ग्रह के निर्बल या दूषित होने के लक्षण : 

असाध्य रोगों के कारण परेशानी, सिरदर्द, बुखार, नेत्र संबंधी कष्ट, सरकार से परेशानी, नौकरी में अड़चनें आएं तो, समझ लीजिये सूर्य ग्रह खराब है। 

सूर्य ग्रह के दोष को मुक्त करने के लिए रत्न – माणिक  

वैदिक ज्योतिष के अनुसार माणिक्य रत्न, सूर्य का प्रतिनिधित्व करता है|  इस रत्न पर सूर्य का स्वामित्व है| यह लाल या हलके गुलाबी रंग का होता है| यह एक मुल्वान रत्न होता है, यदि जातक की कुंडली में सूर्य अशुभ  प्रभाव में होता है तो माणिक्य रत्न धारण करना चाहिए| इसके धारण करने से धारण करता को अच्छे स्वास्थ्य के साथ साथ पद-प्रतिष्ठा, अधिकारीयों से लाभ प्राप्त होता है| शत्रु से सुरक्षा, ऋण मुक्ति, एवं आत्म स्वतंत्रता प्रदान होती है| माणिक्य एक बहुमूल्ये   रत्न है और यह उच्च कोटि का मान-सम्मान एवम पद की प्राप्ति करवाता है! सत्ता और राजनीती से जुड़े लोगो को माणिक्य अवश्य धारण करना चाहिए क्योकि यह रत्न सत्ता धारियों को एक उचे पद तक पहुचाने में बहुत सहायता कर सकता है |

माणिक धारण करने की विधि :

सर्व प्रथम आप अपनी कुंडली किसी विद्वान ज्योतिष को दिखाएँ , यदि ज्योतिष आपको माणिक पहनने की सलाह देता है तो ही पहने | माणिक्य धारण करना हो तो तो कम से कम 5.25 रत्ती  से 7.25 रत्ती का लाल या हलके गुलाबी रंग का पारदर्शी माणिक्य ताम्बे की या स्वर्ण अंगूठी में जड्वा कर किसी भी शुक्ल पक्ष के प्रथम रविवार को धारण करे | ध्यान रहे : माणिक प्राण प्रितिष्ठित करवा कर ही पहने, बिना प्राणपृष्ठ किये हुए माणिक पहनने का कोई लाभ नहीं होता | माणिक धारण करने से पूर्व  ” ॐ घ्रणिः सूर्यायनम: ” मन्त्रकाजाप 108 बारी करके अंगूठी को धुप दीप पुष्प अर्पित करें , सूर्य को अर्घ  दें और मंदिर में जाकर यथा शक्ति गेहूं का एवं ताम्बे के लोटे का दान करें , देवता  के चरणों से स्पर्श करवा कर दाएं हाथ की अनामिका ऊँगली ( अंगूठे से तीसरी ) में धारण करे |माणिक्य, धारण करने के दिन से दस – बारह दिन में प्रभाव देना प्रारंभ करता है और अच्छा रत्न लगभग तीन  वर्ष तक पूर्ण प्रभाव देता है फिर निषक्रिय हो जाता है | अच्छे प्रभाव के लिए  पारदर्शी माणिक्य ही धारण करे | सस्ते रत्नों को धारण करने से हानी हो सकती है |

यदि माणिक लेने की क्षंमता न हो तो माणिक का उपरत्न – सूर्यकांत या लालड़ी भी पहना जा सकता है पर इसके परिणाम बहुत ही नाम मात्र के आते हैं | पहचानने के लिए इन के चित्र नीचे दे रहे हैं |

लालड़ी                  सूर्यकांत

ध्यानरहे : माणिक्य के साथ शुक्र ग्रह का रत्न – हीरा , जिरकन  एवं शनि ग्रह का रत्न – नीलम ,नीली , कटहला नहीं पहनना चाहिए |

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