posted by Guruji Dharamveer Attri

Vastu Cosmos | Ratan kya hai | Guruji Dharmveer Attri

रत्न धरती के गर्भ से उत्पन एक प्रकार के खनिज  पदार्थ हैं |  जो प्रकृति की गोद में भिन्न-भिन्न रूपों में पाए जाते हैं। दरअसल, ये भिन्न-भिन्न तत्वों के आपस में मिलने अर्थात् क्रिया-प्रतिक्रिया के फलस्वरूप बनते हैं। इन रत्नों में मुख्यतः कार्बन, बेरियम, बेरिलियम, एल्यूमीनियम, कैल्शियम, जस्ता, टिन, तांबा, हाइड्रोजन, लोहा, फॉस्फोरस, मैंगनीज़, गंधक, पोटैशियम, सोडियम, जिंकोनियम आदि तत्त्व उपस्थित होते हैं। जिसका उल्लेख हमारे प्राचीन आयुर्वेद एवं ज्योतिष शास्त्र में प्रमुखता से मिलता है| जिनमें से कुछ असाध्य रोगों के उपचार में भी इस्तेमाल किये जाते हैं | यहाँ हम सिर्फ ज्योतिष में रत्नो के प्रभाव का जिक्र कर रहे हैं |जातक के पैदा होने के समय जो जो ग्रह सौरमण्डल में उस समय धरती के करीब होंगे उन उन ग्रहों का प्रभाव जातक पर ज्यादा होता है और जातक उन ग्रहों के प्रभाव से आगे बढ़ता है ज्योतिष शास्त्र में हर ग्रह  का एक  रत्न, उपरत्न एवं धातु निर्धारित  किया गया है जो निर्बल ग्रहों को सबल एवं ग्रहों के दुष्प्रभाव को समाप्त करता है परन्तु यह जातक के जनम लगन या जनम कुंडली एवं वर्तमान गोचर कर रहे ग्रहों से ही विचार किया जाता है क्योंकि कुंडली की गणना से ही पता लगाया जाता है की कौन सा ग्रह सबल है और कौन सा निर्बल , कौन सा ग्रह अच्छा फल देगा और कौन सा बुरा |

ग्रह और सम्बंधित रत्न :

सूर्यमाणिक , लालड़ी , लालहकीक

चंद्रमोती , सफ़ेद  हकीक

मंगलमूंगा , लालहकीक

बुधपन्ना , हराहकीक

ब्रहस्पतिपुखराज , सुनेला , पीलाहकीक

शुक्रहीरा , फायरओपल , जिरकॉन 

शनिनीलम , नीली , कटेला , सुलेमानी  हकीक

राहुगोमेद , सुलेमानी  हकीक

केतुलहसुनिया , सुलेमानी  हकीक

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