posted by Guruji Dharamveer Attri

शंख एक सागर के जलचर द्वारा बनाया हुआ ढाँचा है, जो कि ज्यादातर पेचदार वामावर्त या दक्षिणावर्त में बना होता है। यह हिन्दु धर्म में अति पवित्र माना जाता है। यह धर्म का प्रतीक माना जाता है। यह भगवान विष्णु के दांए ऊपरी हाथ में होता है। धर्मिक अवसरों पर इसे फूँक कर बजाया भी जाता हैद्य भगवान विष्णु का शंख पाञ्चजन्य है। विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण पाञ्चजन्य नामक एक शंख रखते थे ऐसा वर्णन महाभारत में प्राप्त होता है। श्रीमद्भगवद्गीता जो कि महाभारत का अंग है उस में वासुदेव श्रीकृष्ण द्वारा कुरुक्षेत्र युद्ध के दौरान इसका इस्तेमाल किया गया है।

पूजा-पाठ में शंख बजाने का चलन युगों-युगों से हैद्य देश के कई भागों में लोग शंख को पूजाघर में रखते हैं और इसे नियमति रूप से बजाते हैं. ऐसे में यह उत्सुकता एकदम स्वाभाविक है कि शंख केवल पूजा-अर्चना में ही उपयोगी है या इसका सीधे तौर पर कुछ लाभ भी हैद्य

दरअसल, सनातन धर्म की कई ऐसी बातें हैं, जो न केवल आध्यात्मिक रूप से, बल्कि कई दूसरे तरह से भी फायदेमंद हैं. शंख रखने, बजाने व इसके जल का उचित इस्तेमाल करने से कई तरह के लाभ होते हैं. कई फायदे तो सीधे तौर पर सेहत से जुड़े हैं. पूजा में शंख बजाने और इसके इस्तेमाल से निम्न फायदे होते हैं.

Ø ऐसी मान्यता है कि जिस घर में शंख होता है, वहां लक्ष्मी का वास होता है. धार्मिक ग्रंथों में शंख को लक्ष्मी का भाई बताया गया है, क्योंकि लक्ष्मी की तरह शंख भी सागर से ही उत्पन्न हुआ है. शंख की गिनती समुद्र मंथन से निकले चैदह रत्नों में होती है.

Ø शंख को इसलिए भी शुभ माना गया है, क्योंकि माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु, दोनों ही अपने हाथों में इसे धारण करते हैं.

Ø पूजा-पाठ में शंख बजाने से वातावरण पवित्र होता है. जहां तक इसकी आवाज जाती है, इसे सुनकर लोगों के मन में सकारात्मक विचार पैदा होते हैं. अच्छे विचारों का फल भी स्वाभाविक रूप से बेहतर ही होता है

Ø शंख के जल से शिव, लक्ष्मी आदि का अभिषेक करने से ईश्वर प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा प्राप्त होती है.

Ø ब्रह्मवैवर्त पुराण में कहा गया है कि शंख में जल रखने और इसे छड़िकने से वातावरण शुद्ध होता हैद्य

Ø शंख की आवाज लोगों को पूजा-अर्चना के लिए प्रेरित करती है. ऐसी मान्यता है कि शंख की पूजा से कामनाएं पूरी होती हैं. इससे दुष्ट आत्माएं पास नहीं फटकती हैं.

Ø वैज्ञानिकों का मानना है कि शंख की आवाज से वातावरण में मौजूद कई तरह के जीवाणुओं-कीटाणुओं का नाश हो जाता है. कई प्रयोगों से इस तरह के नतीजे मिले हैंद्य

Ø आयुर्वेद के मुताबिक, शंख की भस्म के उपयोग से पेट की बीमारियां, पथरी, पीलिया आदि कई तरह की बीमारियां दूर होती हैंद्य

Ø शंख बजाने से फेफड़े का व्यायाम होता है. पुराणों के जिक्र मिलता है कि अगर श्वास का रोगी नियमित तौर पर शंख बजाए, तो वह बीमारी से मुक्त हो सकता हैद्य

Ø शंख में रखे पानी का सेवन करने से हड्डियां मजबूत होती हैं. यह दांतों के लिए भी लाभदायक है. शंख में कैल्शयिम, फास्फोरस व गंधक के गुण होने की वजह से यह फायदेमंद हैद्य

Ø वास्तुशास्त्र के मुताबिक भी शंख में ऐसे गुण होते हैं, जिससे ये घर में नाकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा में परवर्तित करता है . शंख की आवाज से ‘सोई हुई भूमि‘ जाग्रत होकर शुभ फल देती हैद्य

Ø जब शंख को नियंत्रित सांस के साथ बजाया जाता है, तो ‘‘ओम‘‘ की मूल ध्वनि उससे निकलती है। यह सनातन ध्वनि सभी वेदों की उत्पत्ति है। वेदों में निहित सभी ज्ञान ओम की सर्वव्यापी उदात्त ध्वनि का विस्तार है। यह वह ध्वनि थी जिसे ब्रह्माण्ड प्रकट करने से पहले भगवान ने जप किया था। यह सृष्टि और उसके पीछे के सत्य का प्रतिनिधित्व करता है।

Ø शंख बजाने से सकारात्मक मनोवैज्ञानिक स्पंदन बढ़ता है जैसे साहस, दृढ़ संकल्प, आशा, आशावादिता, इच्छाशक्ति और आनंद जैसी अनुभूति सभी लोगों द्वारा महसूस किए जा सकते हैं।

Ø जैसे ही शंख को फूंका जाता है, दिव्य ऊर्जा (शक्ति) की आवृत्तियों को ध्वनि उत्पन्न होने के कारण वातावरण में उत्सर्जित किया जाता है। इन ऊर्जा आवृत्तियों को लाल रंग में देखा जाता है। इन ऊर्जा आवृत्तियों के साथ-साथ चैतन्य के पीले घेरे भी वायुमंडल में प्रक्षेपित होते हैं। आप वातावरण में ब्लिस के गुलाबी कणों को उत्सर्जित होते हुए भी देख सकते हैं। इससे वातावरण में शक्ति (ऊर्जा), चैतन्य- या और आनंद का अनुपात बढ़ जाता है और यही कारण है कि नकारात्मक ऊर्जाएं व्यथित होकर भाग जाती हैं। शंख की एक और खासियत यह है कि इसे बजाने पर निकलने वाला कंपन वायुमंडल में कीटाणुओं को पैदा करने वाली नाकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करता है। तथा इसकी ध्वनि से हानिकारक अदृश्य वायरस कीड़े गायब हो जाते हैं।

Ø यदि कोई व्यक्ति अपने कान के पास शंख ले जाता है, तो कान में महासागर की लहरों की आवाज सुनी जा सकती है। यह वास्तव में पृथ्वी की प्राकृतिक कंपन या ब्रह्मांडीय ऊर्जा है जो शंख में प्रवेश करने पर बढ़ जाती है। जिस क्षण शंक बजाया जाता है हमारा मस्तिष्क सभी विचारों से मुक्त हो जाता है। 

Ø ऐसा माना जाता है कि नियमित रूप से शंख बजाने से हृदय की रुकावटें दूर हो जाती हैं और इससे श्वसन प्रणाली में भी सुधार होता है।

Ø एक शंख में रात भर पानी रखें और अगली सुबह इस पानी से अपनी त्वचा की मालिश करें। यह कई त्वचा रोगों, चकत्ते, एलर्जी आदि को ठीक करता है। अगर एक महीने तक प्रक्रिया दोहराई जाए तो यह त्वचा परः नूीपजम धब्बों को भी ठीक करता है। रात भर पानी स्टोर करें, इसमें गुलाब जल मिलाएं। इस मिश्रण से अपने बालों को धोएं। बालों का प्राकृतिक रंग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाएगा।  सोने से पहले प्रतिदिन पांच मिनट तक शंख से धीरे-धीरे रगड़ने से आंखों के नीचे के काले घेरों को ठीक किया जा सकता है द्य शंख का उपयोग आयुर्वेद दवाओं में भी किया जाता है। इसकी भस्म आमतौर पर रजोनिवृत्ति के इलाज के लिए काम आती है। शंख में कैल्शियम, आयरन और मैग्नीशियम होते हैं। यह अपने एंटासिड और पाचन गुणों के लिए आयुर्वेद में अच्छी तरह से जाना जाता है।

Ø सार . भगवान विष्णु, देवी सरस्वती, देवी लक्ष्मी, भगवान कृष्ण, भगवान बालाजी, भगवान गणेश के चरणों  ध्यान में करते हुए, घर में हमेशा शंख बजाना चाहिए इससे जीवन की आधी समस्याएं बिना किसी औषधि के ही ठीक होे जायेंगी।

पूजा-पाठ में शंख बजाने का चलन युगों-युगों से हैद्य देश के कई भागों में लोग शंख को पूजाघर में रखते हैं और इसे नियमति रूप से बजाते हैं. ऐसे में यह उत्सुकता एकदम स्वाभाविक है कि शंख केवल पूजा-अर्चना में ही उपयोगी है या इसका सीधे तौर पर कुछ लाभ भी हैद्य

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